Vice President Election 2025: उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आते ही देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। एनडीए (NDA) के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन ने बड़ी जीत दर्ज की, जबकि INDIA गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीद से कम वोट मिले। अब सबसे ज्यादा चर्चा में है 14 वोटों का रहस्य, जिसने विपक्षी खेमे में खलबली मचा दी है।
एनडीए की आसान जीत, विपक्ष का खेल बिगड़ा
नतीजों के मुताबिक राधाकृष्णन को 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी को सिर्फ 300 वोट हासिल हुए। INDIA ब्लॉक को कम से कम 314 वोटों की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। विपक्ष की ओर से वोट इधर खिसकने की वजह से अब ‘गद्दारी’ और ‘क्रॉस वोटिंग’ की चर्चा हर जगह है।
14 वोट का रहस्य
एनडीए के पास कुल लगभग 438 वोट थे, लेकिन राधाकृष्णन को 452 वोट मिल गए। यानी 14 अतिरिक्त वोट। यही 14 वोट आज की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल बन गए हैं। विपक्षी खेमे में यह चर्चा है कि आखिर उनके अपने सांसदों में से किसने पाला बदला।
नतीजों के बाद विपक्षी दलों के बीच माहौल तनावपूर्ण है। TMC ने आरोप लगाया कि सांसदों को तोड़ने के लिए 15-20 करोड़ रुपये तक खर्च किए गए। वहीं कांग्रेस और वाम दल जांच की बात तो कर रहे हैं, लेकिन किसी का नाम लेने से बच रहे हैं।
किन दलों पर शक?
किसी का नाम आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं में दो दलों पर शक गहराया है। इनमें एक बड़ा क्षेत्रीय दल और एक छोटा सहयोगी शामिल हो सकता है। जिन दलों में पहले से असहमति या नाराजगी थी, वहीं से क्रॉस वोटिंग की संभावना बताई जा रही है।
INDIA गठबंधन अब अंदरूनी जांच में जुटा है, लेकिन चुनौती यह है कि चुनाव गुप्त मतदान से हुआ। ऐसे में किसी सांसद की पहचान करना लगभग असंभव है। यही कारण है कि विपक्ष सिर्फ शक जता पा रहा है, ठोस सबूत उनके पास नहीं हैं।
राजनीति पर असर
यह नतीजा केवल हार-जीत से ज्यादा है। इसने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद से ही INDIA ब्लॉक में मनमुटाव की खबरें थीं, और अब उपराष्ट्रपति चुनाव ने इन खटपट को और उजागर कर दिया। वहीं एनडीए इसे अपनी मजबूती के रूप में पेश कर रहा है।
उपराष्ट्रपति चुनाव का नतीजा विपक्ष के लिए बड़ा झटका है। 14 वोट का रहस्य आने वाले महीनों तक चर्चा में रहेगा। क्या INDIA गठबंधन अपने ‘गद्दारों’ की पहचान कर पाएगा या यह रहस्य हमेशा अनसुलझा रहेगा? फिलहाल इतना तय है कि इस हार ने विपक्ष की एकता पर सवाल खड़े किए हैं और एनडीए को नई ताकत दी है।



