नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर पेड अभियान चलाया गया। गडकरी ने साफ तौर पर कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें बदनाम करने और जनता को भ्रमित करने के लिए पैसे खर्च किए।भारत सरकार पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और क्रूड ऑयल पर निर्भरता घटाना है। लेकिन इसी नीति को लेकर सोशल मीडिया पर नितिन गडकरी को लगातार ट्रोल और निशाना बनाया गया। मंत्री का कहना है कि इस अभियान के पीछे वही लॉबी और कंपनियां हैं जिन्हें इस नीति से आर्थिक नुकसान हो सकता है।
गडकरी ने कहा –
“मेरे खिलाफ एक संगठित और पेड कैंपेन चलाया गया। लोगों को E20 पेट्रोल को लेकर गलतफहमी में डालने की कोशिश की गई। लेकिन मैं साफ कर देना चाहता हूं कि यह नीति देशहित और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है।”
भारत हर साल अरबों डॉलर का कच्चा तेल आयात करता है। वहीं, ईंधन प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। ई20 से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी बल्कि किसानों को एथेनॉल उत्पादन से सीधी आमदनी भी होगी। यही कारण है कि सरकार 2030 तक भारत को फ्लेक्स-फ्यूल और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की दिशा में आगे ले जाने का लक्ष्य बना रही है।
गडकरी के आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोग मान रहे हैं कि पेट्रोल कंपनियों और पुरानी लॉबी को इस बदलाव से परेशानी है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि ई20 से गाड़ियों पर तकनीकी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलाव धीरे-धीरे होगा और कंपनियां नई तकनीक अपनाएंगी।
विपक्षी दलों ने गडकरी के आरोपों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि उनके पास सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए। विपक्ष का यह भी कहना है कि सरकार पारदर्शिता से बताए कि किन कंपनियों या लॉबी को इस नीति से दिक्कत है।
नितिन गडकरी को उनकी साफ छवि और विकास कार्यों के लिए जाना जाता है। सड़क निर्माण, ग्रीन हाईवे और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने में उनकी अहम भूमिका रही है। शायद यही वजह है कि कई बार वे उन ताकतों के निशाने पर आ जाते हैं जिन्हें बदलाव पसंद नहीं आता।
गडकरी का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत आरोप नहीं बल्कि देश की ऊर्जा नीति से भी जुड़ा हुआ है। अगर वास्तव में उनके खिलाफ पेड कैंपेन चलाया गया है, तो यह सरकार की योजनाओं और पर्यावरणीय सुधारों को कमजोर करने की कोशिश है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस पर सरकार क्या कदम उठाती है और क्या विपक्ष इसे संसद में मुद्दा बनाएगा।



