नेपाल में हालिया राजनीतिक संकट ने हालात को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के इस्तीफे के बाद देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब नेपाल सेना के हाथ में है।
काठमांडू में पिछले कुछ दिनों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जिनमें कम से कम 19 लोगों की जान गई और कई सरकारी इमारतें आग की भेंट चढ़ गईं। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ गुस्सा जताया।
नेपाल सेना ने मंगलवार रात से सुरक्षा अभियानों की कमान अपने हाथ में ले ली। त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी अब सेना के नियंत्रण में है। इसके चलते कई उड़ानें रद्द या डायवर्ट हो गईं, जबकि कुछ उड़ानों को लखनऊ और दिल्ली भेजा गया।
राजनीतिक हालात और आगे क्या?
प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद, राष्ट्रपति पौडेल ने सभी राजनीतिक दलों से शांतिपूर्ण बातचीत और मिलकर समाधान खोजने की अपील की है। फिलहाल सेना ही सुरक्षा बनाए रखने का काम कर रही है। अब सवाल यह है कि यह केवल अस्थायी व्यवस्था है या नेपाल में कायमी राजनीतिक बदलाव का संकेत।
भारत समेत कई देशों ने नेपाल में जारी हिंसा और अस्थिरता पर चिंता जताई है। भारत ने शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचना जरूरी है।
नेपाल इस समय एक नाजुक स्थिति में है। अगर सेना को राजनीतिक नेतृत्व से स्पष्ट दिशा नहीं मिलती, तो यह देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।



