भारत की अर्थव्यवस्था में बदलाव की तस्वीर अक्सर नीतियों और सुधारों से तय होती है। ऐसा ही एक बड़ा सुधार था वस्तु एवं सेवा कर (GST), जिसने पूरे देश को एक संयुक्त बाजार में बदलने का काम किया। अब सरकार इसकी प्रक्रिया को और आसान बनाने पर काम कर रही है। उद्योग जगत और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि आने वाले सुधार न सिर्फ कारोबारियों को राहत देंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी नई उड़ान देंगे।
कारोबारियों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद
छोटे और मध्यम उद्यम (SMEs) लंबे समय से जीएसटी प्रक्रिया को जटिल मानते रहे हैं। बार-बार रिटर्न भरना, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के विवाद और अलग-अलग स्लैब की उलझनें उनके लिए बड़ी समस्या रही हैं। अब सरकार का फोकस इन्हीं दिक्कतों को दूर करने पर है।
“यदि जीएसटी फाइलिंग आसान हो जाती है और स्लैब्स कम होते हैं तो छोटे व्यापारी बिना झिझक औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन पाएंगे। यह बदलाव उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा।” – FICCI प्रतिनिधि
भारत पहले ही दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। लेकिन विदेशी निवेशक हमेशा एक स्थिर और पारदर्शी कर प्रणाली चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी सुधार इस दिशा में बड़ा कदम होंगे।
“जीएसटी ने भारत को एक समान बाजार दिया। अब यदि इसकी जटिलताओं को कम कर दिया जाए तो लेन-देन की लागत घटेगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निवेशकों को लंबी अवधि के अवसर मिलेंगे।” – अर्थशास्त्री
टैक्स कलेक्शन में नई ऊँचाइयाँ
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि हाल के महीनों में जीएसटी संग्रह लगातार ₹1.6 लाख करोड़ के पार बना हुआ है। यह दिखाता है कि लोग धीरे-धीरे अधिक अनुपालन (compliance) की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सुधार आने के बाद यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है।
सरकार के लिए यह अतिरिक्त राजस्व सड़क, रेल, बिजली जैसे बुनियादी ढांचे और गरीबों के लिए कल्याण योजनाओं पर खर्च करने में मददगार होगा।
हालाँकि, यह कहना गलत होगा कि जीएसटी पूरी तरह परेशानी मुक्त है। पाँच स्लैब की व्यवस्था ने कारोबारियों को उलझा रखा है। कई बार पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ियाँ भी व्यवसायियों के लिए सिरदर्द बन जाती हैं।
उद्योग जगत की लंबे समय से माँग है कि कर संरचना को तीन स्लैब में सीमित किया जाए और ITC विवादों का समाधान तेज़ी से किया जाए।
अब सारी निगाहें जीएसटी काउंसिल की बैठकों पर टिकी हैं। चूँकि इसमें राज्यों और केंद्र दोनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, इसलिए सहमति बनाना आसान नहीं होगा। लेकिन उद्योग जगत को भरोसा है कि इस बार ठोस कदम उठाए जाएंगे।
“यह सुधार भारत की ग्रोथ स्टोरी को नई दिशा देंगे। उत्पादन, सेवाओं और निर्यात—सबको फायदा होगा। अंततः इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचेगा, क्योंकि वस्तुएँ और सेवाएँ सस्ती होंगी।” – उद्योगपति
भारत का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में वह 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बने। इसके लिए जीएसटी सुधार अहम साबित होंगे। आसान नियम, कम बोझ और पारदर्शी व्यवस्था से न केवल कारोबारी माहौल सुधरेगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।



