क्या नेपाल सीमा पर मोबाइल नेटवर्क की कमजोरी अपराधियों को फायदा पहुंचा रही है?

पटना। बिहार-नेपाल सीमा पर कमजोर नेटवर्क और संचार व्यवस्था की खामियां पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। सीमावर्ती इलाकों में नेटवर्क कवरेज इतना कमजोर है कि कई बार जवानों और खुफिया अधिकारियों को संवेदनशील सूचनाओं के आदान-प्रदान में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इससे न केवल ऑपरेशनल गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, बल्कि सूचना लीक होने की आशंका भी तेजी से बढ़ गई है।

नेपाल सीमा से लगे सीतामढ़ी, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों में पुलिस को लगातार नेटवर्क समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सूत्रों के अनुसार, कई बार वॉकी-टॉकी या अन्य संचार माध्यम भी पर्याप्त नहीं होते, ऐसे में मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर रहना मजबूरी बन जाता है। मगर यहां अक्सर कॉल ड्रॉप, इंटरनेट स्पीड की समस्या और नेटवर्क फेल्योर देखने को मिलती है।

सूचना लीक होने का खतरा

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस वजह से संवेदनशील सूचनाओं को भेजने और प्राप्त करने में विलंब होता है। कई बार स्थानीय लोग विदेशी नेटवर्क का उपयोग करते हैं, जिससे डाटा सिक्योरिटी पर भी सवाल खड़े होते हैं। इससे सीमा पर अपराधियों, तस्करों और आतंकी गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई करने में मुश्किल आती है।

सीमा पर सक्रिय नेटवर्क माफिया

जानकारी मिली है कि कुछ सीमावर्ती गांवों में नेपाल के मोबाइल नेटवर्क आसानी से उपलब्ध रहते हैं। लोग भारतीय नेटवर्क की बजाय नेपाली सिम कार्ड का इस्तेमाल करने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है क्योंकि इससे कॉल डिटेल्स और लोकेशन ट्रैकिंग में कठिनाई आती है।

सीमा पर तैनात पुलिस और एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) के जवानों को लगातार इस समस्या से जूझना पड़ता है। अधिकारियों का कहना है कि कई बार संवेदनशील ऑपरेशनों में समय पर संदेश नहीं पहुंच पाता, जिससे अपराधियों को फायदा मिल जाता है। यह भी खतरा है कि साइबर अपराधी इस स्थिति का फायदा उठाकर सूचनाएं हैक या इंटरसेप्ट कर सकते हैं।

सरकार और प्रशासन की पहल

राज्य सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है। हाल ही में गृह विभाग ने केंद्र को पत्र लिखकर नेपाल सीमा के सभी इलाकों में नेटवर्क स्ट्रेंथ बढ़ाने और अतिरिक्त टावर लगाने की मांग की है। इसके साथ ही इमरजेंसी कम्युनिकेशन सिस्टम को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि सीमा क्षेत्र में रहने वाले आम नागरिक भी नेटवर्क की कमजोरी से परेशान हैं। कॉल ड्रॉप और इंटरनेट की समस्या के चलते पढ़ाई, कारोबार और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। कई गांवों के लोग बताते हैं कि अक्सर उन्हें नेपाल की सिम पर ही कॉल रिसीव करनी पड़ती है।

बिहार-नेपाल सीमा पर कमजोर नेटवर्क न केवल सुरक्षा के लिहाज से चुनौती है, बल्कि यह आम जनता के जीवन पर भी प्रतिकूल असर डाल रहा है। अगर समय रहते तकनीकी सुधार नहीं किए गए, तो संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने और सीमा अपराधों के बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। सरकार और संबंधित एजेंसियों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

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