दिल्ली में भारी बारिश का कहर: राजधानी दिल्ली में गुरुवार सुबह मूसलाधार बारिश के बाद जीटी करनाल रोड (नेशनल हाईवे 44) पर स्थित एक फ्लाईओवर का हिस्सा अचानक ढह गया। हादसा ऐसे वक्त हुआ जब पूरे शहर में बारिश के चलते पहले से ही भारी जलभराव और जाम की स्थिति बनी हुई थी। यह फ्लाईओवर उत्तरी दिल्ली के अलीपुर क्षेत्र के पास स्थित है और दिल्ली से हरियाणा की ओर जाने वाले हज़ारों वाहन इस रास्ते से रोज़ाना गुजरते हैं।
हादसे की जानकारी और समय
घटना सुबह क़रीब 7:30 बजे की बताई जा रही है, जब तेज़ बारिश के बीच फ्लाईओवर की एक पट्टी अचानक भरभराकर गिर गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि जिस वक्त फ्लाईओवर का हिस्सा गिरा, उस समय नीचे से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था, जिससे किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं मिली है।
प्रत्यक्षदर्शियों की ज़ुबानी
स्थानीय निवासी रमेश यादव ने बताया, “अगर मैं 5 मिनट पहले वहां पहुंचता, तो शायद हादसे की चपेट में आ जाता।” वहीं दुकानदार संजय गुप्ता ने कहा कि फ्लाईओवर में पहले से दरारें थीं और प्रशासन को इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन और राहत कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और NHAI की टीमें मौके पर पहुंचीं। इलाके को खाली कराया गया और ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी किया जा रहा है।
यातायात पर असर
एनएच-44 दिल्ली को करनाल, पानीपत, अंबाला जैसे शहरों से जोड़ता है। इसके बंद होने से यात्रियों और ट्रकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक मार्गों जैसे बाहरी रिंग रोड और एनएच-9 का उपयोग करने की सलाह दी है।
बुनियादी ढांचे की पोल
लगातार बारिश के कारण दिल्ली में जलभराव की स्थिति है और जगह-जगह सड़कें जर्जर हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश का पानी फ्लाईओवर की नींव को कमजोर कर सकता है, जिससे यह हादसा हुआ।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जांच के आदेश दिए और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं भाजपा नेता मनोज तिवारी ने इसे भ्रष्टाचार और लापरवाही का नतीजा बताया।
फिलहाल प्रशासन का ध्यान मलबा हटाने और ट्रैफिक बहाल करने पर है। हादसे के कारणों की जांच जारी है और इंजीनियरिंग टीम पूरे फ्लाईओवर की संरचना की समीक्षा कर रही है। यह हादसा सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता की मिसाल है। अब वक्त है कि सरकार और एजेंसियां सिर्फ बयानबाज़ी से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाएं।



