PM Modi China visit 2025: ड्रैगन और हाथी की साझेदारी से बढ़े भारत-चीन रिश्ते

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तियानजिन, PM Modi China visit 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन का दौरा कर रहे हैं। यह दौरा दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।इस दौरान पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की और कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

शी चिनफिंग ने पीएम मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि अब समय आ गया है कि चीन और भारत, यानी ड्रैगन और हाथी, एकजुट हों। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए भी फायदेमंद रहेगा।

शी चिनफिंग ने यह भी कहा कि दोनों देश प्राचीन सभ्यताओं के प्रतिनिधि हैं और दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले देश होने के नाते, दोनों की जिम्मेदारी क्षेत्रीय और वैश्विक शांति बनाए रखना है।

चीनी राष्ट्रपति ने कहा,

पीएम मोदी से दोबारा मिलकर और SCO सम्मेलन में उनका स्वागत करना मेरे लिए खुशी की बात है। पिछली साल कजान में हमारी बैठक सफल रही थी, जिसने भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत की। आज दुनिया कई बदलावों से गुजर रही है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं। ऐसे समय में भारत और चीन दोनों को अपनी साझेदारी को मजबूत करना चाहिए। हमारे कंधों पर पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी है और हमें एशिया और दुनिया में शांति बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।”

पीएम मोदी ने भी सहयोग पर जोर दिया

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच 75 साल के संबंध हैं। उन्होंने बताया कि सीमा विवाद के बाद दोनों देशों ने संवाद और शांति के रास्ते को अपनाया। इसके परिणामस्वरूप कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं।पीएम मोदी ने कहा, “इस साझेदारी से लगभग 2.8 अरब लोगों को लाभ मिलेगा। हमारे देशों की आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कड़ियाँ मजबूत होंगी। यह सहयोग केवल भारत-चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए स्थिरता और विकास का मार्ग खुलेगा।”

क्षेत्रीय और वैश्विक दृष्टिकोण

हाल के वर्षों में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और अन्य मतभेद देखने को मिले हैं, लेकिन दोनों देशों ने लगातार कूटनीति और संवाद के माध्यम से समस्याओं को हल करने का प्रयास किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम मोदी का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि एशिया में स्थिरता और वैश्विक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण है।दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में सुधार पर भी जोर दिया।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और चीन सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से भी जुड़े हुए हैं।

उन्होंने चीन में बौद्ध संस्कृति और भारत में हिंदू धर्म के ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ेगा।इस दौरे का एक उद्देश्य SCO सम्मेलन में भाग लेना भी है। इसके माध्यम से भारत और चीन न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर सकते हैं, बल्कि पूरे एशिया और ग्लोबल साउथ में सुरक्षा, विकास और सहयोग को भी बढ़ावा दे सकते हैं।प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की यह बैठक भारत-चीन संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की यह बैठक भारत-चीन संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। दोनों नेताओं ने विश्वास, सहयोग और शांति पर जोर दिया। शी चिनफिंग की तरफ से ड्रैगन और हाथी की तुलना यह दर्शाती है कि अब समय आ गया है कि दोनों देश साझेदारी और सहयोग के नए रास्ते तलाशें।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ और एशिया में स्थिरता स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

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