Sherry Singh Mrs Universe 2025: “मकौड़ा से मनीला तक” — एक सपने की कहानी

Sherry Singh

Sherry Singh Mrs Universe 2025

Sherry Singh। Mrs Universe 2025: 12 october 2025 को रात में  शैरी सिंह ने Mrs Universe 2025 का खिताब जीत कर भारत का नाम रोशन कर दिया हैं। इन्होंने ऐसा काम कर दिखाया है कि जब पहली बार भारतीय महिला अपने नाम खिताब कर लिया हो।भारत ने यह खिताब 48 साल से इंतजार किया है और जब शीरी सिंह के सर पर सजा है, तो भारत के नागरिक का सर ऊंचा हो हो गया है।

साधारण महिला ने असाधारण कहानी लिखी

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव मकौड़ा से आनी वाली शैरी का सफर न केवल प्रेरणादायक है बल्कि यह यह कहानी उस हर महिला के लिए हैं जो शादी, मां बनने या उम्र बढ़ने के बाद अपने सपने को भूल जाती हैं। यह कहानी कोई फिल्म स्टार से कम नहीं हैं।आपको यह जान कर आश्चर्य लगेगा कि शैरी सिंह 35 वर्ष की केवल फैशन प्रोफेशनल नहीं हैं बल्कि एक समर्पित मां भी है, पत्नी,समाज सेवक में भी उनका बहुत बड़ा योगदान है।उन्होंने यह खिताब जीत कर साबित कर दिया है कि एक महिला किसी भी भूमिका में सीमित नहीं होती होती हैं वह मां, नेता, समाजसेवी और विश्व सुन्दरी भी बन सकती हैं ।

मंच पर काफी ऐतिहासिक समय

Sherry Singh Mrs Universe 2025

मिसेज यूनिवर्स 2025 प्रतियोगिता का आयोजन ओकाड़ा मनीला , फिलीपींस में हुआ,जहां 120 देशों की प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जब विजेता रूप में भारत का नाम लिया गया तो शैरी की आंखों में आंसु छलक पड़े। चारों ओर से तालियों का गड़गड़ाहट थी और भारत का तिरंगा लहरा रहा था।

परिवार से मिली पॉजिटिव ताकत

शैरी के पति शिकंदार सिंह ने हमेशा उनका साथ दिया और उनके बेटे ने हमेशा उनको प्रेरित किया कि एक मां भी विश्व सुंदरी के मंच पर चमक सकती है और अपना नाम खिताब मै रच सकती हैं। शैरी सिंह ने खुद कहा कि,

ये जीत मेरी नहीं है, बल्कि उन हर महिला की हैं जिसे कभी कहा गया था कि तुम नहीं कर सकती हो। मेरा बेटा जब बड़ा होगा तो वह देखेगा कि उसकी मां ने क्या हासिल किया हैं

पढ़ाई और सामाजिक विचार

शैरी सिंह ने फैशन डिजाइन में मास्टर डिग्री लिया हैं। साथ हे वह एक फुटबॉल प्लेयर भी रहे हैं । वे महिला के शक्तिकारण, मानसिक स्वास्थ और बेटी लोग के लिए वे इन मुद्दों पर हमेशा काम करती रही है।

मिस यूनिवर शैरी सिंह ने मंच पर कहा कि,

खूबसूरती सिर्फ चेहरे से नहीं होता हैं बल्कि खूबसूरती आपके विचार में होनी चाहिए जिससे दूसरों की जीवन सफल और बेहतर बन सके ।

भारत ने पहली बार 1977 मै भाग लिया था, लेकिन उस समय से अभी तक कोई भी भारत से महिला मिसेज यूनिवर्स का खिताब नहीं जीत सकी थी। यह शैरी सिंह की जीत बस प्रतियोगिता में नहीं हैं बल्कि भारत की महिला का मनोबल, संघर्ष, सफलता का मिसाल बन गई है।

शैरी की इस जीत के बाद सोशल मीडिया पर बाधाएं की लाइन लग गई है। बॉलीवुड, फिल्म स्टार, खिलाड़ी , नेता और पूरी देश ने शैरी को बाधाएं दी। एयरपोर्ट पर उनका जोरदार स्वागत हुआ और हजारों लोग वहां पहुंचे हुए थे स्वागत के लिए। फूल, पोस्टर, बैंड बाजों से उनका स्वागत हुआ।

जीत का सफर आसान नहीं

सीरी सिंह ने पहले मिसेज इंडिया 2025 का खिताब जीत चुकी थी, जिसके कारण उन्हें मिसेज यूनिवर्स में प्रतियोगिता और  भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला था। लेकिन यह रास्ता उतना आसान नहीं था, क्योंकि प्रतियोगिता से पहले एक कानूनी विवाद था जिसमें मुंबई हाई कोर्ट ने एक आदेश जारी किया था कि उन्हें किसी भी राष्ट्रीय और अंत राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने से मना किया जाए या रोका जाए। इस विवाद के कारण उन्होंने प्रतियोगिता में मिसेज इंडिया के जगह “मैसेज भारत” के नाम से भाग लिया।शैरी सिंह ने स्पष्ट कहा कि

“भारत और इंडिया में कोई अंतर नहीं है, मैंने अपने देश के प्रतिनिधित्व के लिए किया है, नाम के लिए नहीं।”

जैसा कि आप शैरी के सिर पर मिसेज यूनिवर्स का ताज  आ गया है तो उनकी कुछ योजनाएं अब आगे की है।

  • वह एक फाउंडेशन शुरू करना चाहती है उस फाउंडेशन में उन महिलाओं को मदद मिलेगी जो शादी और मां बनने और घर की स्थिति के कारण खेल छोड़ना पड़ा था।
  • वह महिलाओं के सम्मान, स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण के लिए इन जैसे मुद्दों पर भी कार्य करना चाहती है।
  • इसके अलावा वह एक किताब लिखना चाहती है।

शैरी की इस जीत पर भारत सरकार ने उन्हें ढेरों सारी बधाइयां दी और महिला एवं बाल विकास मंत्री ने उनके साथ सामाजिक कल्याण और अभियानों में सहयोग की बात कर रही है। सोशल मीडिया पर #sherrysingh ट्रेंड्स चल रहा है और देशभर की महिलाओं उन्हें एक रोलमॉडल र की रूप में मैं देख रही है

शैरी सिंह की जीत न केवल मिसेज यूनिवर्स बनती है बल्कि इस जीत का असली प्रेरणा है कि भारतीय नारी का शक्ति ,साहस और सपनों का जीत है। शैरी सिंह हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो कभी अपने सपनों का उमर ,जिम्मेदारी के कारण, समाज के दर से रोका हो। उनकी यह सफलता इस बात की गवाही देता है कि” सुंदर से चेहरे से नहीं होता है ,सोच भी होती है। जब आपकी सोच बड़ी होती है ,तो कोई भी मुकाम दूर नहीं होता है और सपने पूरे होते हैं|

Also Read This:https://newzxpo.com/shubman-gill-century-ravindra-jadeja-three-wicket-haul/

Share:

WhatsApp
Telegram
Facebook
Twitter
LinkedIn