GST रेट कट और H-1B वीजा फीस बढ़ने से शेयर बाजार पर असर, गिफ्ट निफ्टी ने दी गिरावट की चेतावनी

भारतीय शेयर बाजार इस समय दो बड़े फैसलों के असर में है। एक ओर सरकार ने GST दरों में कटौती कर दी है जिससे उपभोक्ता वस्तुओं, ऑटोमोबाइल और निर्माण सेक्टर को सीधा फायदा मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने H-1B वीजा फीस को बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दिया है, जो भारतीय आईटी कंपनियों के लिए चिंता का कारण बन रहा है। इन दोनों घटनाओं के बीच निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कौन से शेयरों में खरीदारी का मौका है और किनमें गिरावट का जोखिम ज्यादा है। गिफ्ट निफ्टी ने आज बाजार में कमजोरी का संकेत दिया है, इसलिए सावधानी के साथ निवेश रणनीति बनाने की जरूरत है।

GST कटौती से कौन से सेक्टर होंगे फायदे में

GST दरों में कटौती से सबसे बड़ा असर उपभोक्ता वस्तुओं और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर पड़ेगा। टीवी, फ्रिज, एसी जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर टैक्स घटने से कीमतें कम होंगी और त्योहारी सीजन में बिक्री बढ़ सकती है। कंपनियों के स्टॉक में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि वोल्टास, हैवेल्स और व्हर्लपूल जैसी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। इसके साथ ही FMCG सेक्टर की बड़ी कंपनियां जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी और डाबर को भी फायदा मिलेगा क्योंकि रोजमर्रा के उत्पाद सस्ते होने से मांग में तेजी आएगी।

ऑटो सेक्टर पर असर

ऑटो सेक्टर भी GST रेट कट से उत्साहित है। छोटे वाहनों और दोपहिया वाहनों की कीमतों में कमी आने की संभावना है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में बिक्री बढ़ सकती है। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, हीरो मोटोकॉर्प और बजाज ऑटो जैसे शेयर इस कारण फोकस में रहेंगे। त्योहारी मौसम नजदीक होने के कारण उपभोक्ताओं का रुझान वाहन खरीद की ओर बढ़ सकता है और इससे ऑटो कंपनियों की आय में तेजी आएगी। निवेशक इस सेक्टर पर नजर बनाए रख सकते हैं।

निर्माण और सीमेंट सेक्टर के लिए भी यह फैसला राहत भरा है। सीमेंट और निर्माण सामग्रियों पर जीएसटी कम होने से इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत घटेगी। इससे नए प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी और कंपनियों के ऑर्डर बुक में सुधार आएगा। अल्ट्राटेक सीमेंट, अंबुजा सीमेंट और श्री सीमेंट जैसी कंपनियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। लंबे समय में यह सेक्टर निवेशकों के लिए अच्छा रिटर्न देने की क्षमता रखता है।

H-1B वीजा फीस बढ़ने से आईटी कंपनियों पर दबाव

दूसरी ओर, अमेरिकी सरकार द्वारा H-1B वीजा फीस में की गई भारी बढ़ोतरी ने भारतीय आईटी कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। अब अमेरिका में कर्मचारियों को भेजने की लागत काफी बढ़ जाएगी। इससे कंपनियों की मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। खासतौर पर मध्यम और छोटी आईटी कंपनियों पर इसका असर ज्यादा होगा क्योंकि उनका बिजनेस मॉडल अमेरिका में काम करने वाले कर्मचारियों पर ज्यादा निर्भर है।

आईटी सेक्टर के बड़े खिलाड़ियों जैसे टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक पर भी इसका असर देखने को मिलेगा, हालांकि इन कंपनियों के पास ज्यादा ऑफशोरिंग क्षमता और विविध बाजार मौजूद हैं जिससे वे इस झटके को झेल सकते हैं। लेकिन अल्पावधि में इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिल सकती है। निवेशकों को इन स्टॉक्स पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि ज्यादा गिरावट आने पर ये अच्छे एंट्री प्वाइंट साबित हो सकते हैं।

आईटी सेक्टर की संभावित रणनीति

विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़ी आईटी कंपनियां धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर भर्ती बढ़ाएंगी और ऑटोमेशन को अपनाकर लागत को कम करने की कोशिश करेंगी। ऐसे में यह गिरावट लंबे समय के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है। हालांकि फिलहाल बाजार में दबाव बने रहने की संभावना ज्यादा है।

गिफ्ट निफ्टी की शुरुआती चाल ने भी यह संकेत दिया है कि बाजार में कमजोरी हावी रह सकती है। वैश्विक संकेत भी फिलहाल नकारात्मक हैं। अमेरिका की आर्थिक नीतियों में अनिश्चितता और चीन की धीमी वृद्धि ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला है। ऐसे में घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। निवेशकों को शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करते समय स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए।

निवेशकों के लिए रणनीति

अगर सेक्टरवार नजर डालें तो आईटी कंपनियों में गिरावट की संभावना है जबकि FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो और सीमेंट सेक्टर में तेजी का माहौल बन सकता है। यानी निवेशकों को इस समय संतुलित पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का फायदा ट्रेडर्स उठा सकते हैं, जबकि लंबी अवधि के निवेशक अच्छे सेक्टर में पोजीशन बना सकते हैं।

त्योहारी सीजन नजदीक होने से उपभोक्ता खर्च बढ़ने की संभावना है। जीएसटी रेट कट ने इस खर्च को और आसान बना दिया है। यही कारण है कि उपभोक्ता वस्तु और ऑटो सेक्टर अगले कुछ महीनों में बाजार के सितारे साबित हो सकते हैं। वहीं आईटी सेक्टर को लेकर निवेशकों को थोड़ी सावधानी बरतनी होगी। अगर यह गिरावट लंबी खिंचती है तो अन्य सेक्टर की मजबूती से बाजार संतुलित रह सकता है।

संक्षेप में कहें तो बाजार इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर है। जीएसटी दरों में कटौती ने घरेलू मांग आधारित सेक्टरों को मजबूत किया है जबकि अमेरिकी वीजा नीति ने आईटी कंपनियों पर दबाव डाल दिया है। ऐसे में निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है सही स्टॉक्स की पहचान करना और जोखिम को ध्यान में रखते हुए पोर्टफोलियो तैयार करना।

निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे ज्यादा नजर रखने वाले सेक्टर होंगे – FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो और सीमेंट। वहीं आईटी सेक्टर में सावधानी के साथ ही कदम रखना चाहिए। अगर गिफ्ट निफ्टी की दिशा को देखें तो शुरुआती सत्र में गिरावट बनी रह सकती है लेकिन सेक्टर आधारित रणनीति बनाकर निवेशक लाभ कमा सकते हैं।

बाजार की यह चाल इस बात की याद दिलाती है कि निवेश हमेशा खबरों और नीतियों से प्रभावित होता है। इसलिए भावनाओं के बजाय ठोस विश्लेषण और समझदारी से निवेश करना ही सबसे बेहतर रास्ता है।

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