नई दिल्ली। आम जनता के लिए बड़ी राहत की खबर है। GST में बदलाव के बाद अब दूध, घी, पनीर और आइसक्रीम जैसे ज़रूरी डेयरी प्रोडक्ट्स के दाम घट गए हैं। यह कदम सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालेगा।
दूध पर सबसे बड़ा असर
भारत में रोज़ाना करोड़ों लीटर दूध की खपत होती है। महंगाई के दौर में जब उपभोक्ता परेशान थे, तब सरकार ने दूध पर GST दर घटा दी। इसका फायदा अब आम परिवारों को मिलेगा। सुबह की चाय से लेकर बच्चों के नाश्ते तक में इस्तेमाल होने वाला दूध अब जेब पर हल्का साबित होगा।
घी और पनीर की कीमतों में गिरावट
भारतीय रसोई में घी और पनीर का महत्व किसी से छिपा नहीं है। त्योहारों की मिठाइयाँ हों या रोज़मर्रा के पकवान, इनका इस्तेमाल हर घर में होता है। पहले इन पर ऊँची दर से टैक्स लगने के कारण कीमतें बढ़ रही थीं, लेकिन अब GST कटौती से इनके दाम 5-10 प्रतिशत तक घटने की उम्मीद है।
गर्मी के मौसम में आइसक्रीम की डिमांड सबसे ज्यादा रहती है। महंगाई के कारण इसकी बिक्री पर असर पड़ा था। लेकिन अब सरकार के फैसले से आइसक्रीम भी सस्ती होगी। इससे उपभोक्ता और कंपनियां दोनों को फायदा होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मांग बढ़ने से इंडस्ट्री को नई रफ्तार मिलेगी।
व्यापारियों और किसानों को भी लाभ
डेयरी सेक्टर से जुड़े व्यापारी और किसान इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। उनका मानना है कि टैक्स में कटौती से न सिर्फ उपभोक्ताओं की जेब पर असर होगा बल्कि दूध की खपत भी बढ़ेगी। इससे किसानों की आमदनी में भी सुधार होगा।
राजनीतिक मायने
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक असर भी रखता है। चुनावी माहौल में महंगाई हमेशा बड़ा मुद्दा बनती है। ऐसे में दूध और घी जैसे ज़रूरी उत्पादों को सस्ता करना जनता को राहत देने और भरोसा जीतने का कदम माना जा रहा है।
यहीं पर Tejashwi Yadav ने बयान दिया कि “जनता को राहत मिलना अच्छी बात है, लेकिन असली मुद्दा demographic बदलाव और रोजगार का है।” वहीं Modi सरकार का कहना है कि यह फैसला सीधे आम आदमी तक राहत पहुंचाने के लिए लिया गया है।
पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ती महंगाई ने उपभोक्ताओं को काफी परेशान कर दिया था। पेट्रोल-डीजल और ज़रूरी सामानों के दाम बढ़ने से घरेलू बजट बिगड़ गया था। अब दूध, घी, पनीर और आइसक्रीम की कीमतें घटने से लोगों को हर महीने कुछ सौ रुपये की बचत होगी।
कुल मिलाकर, GST दरों में बदलाव से दूध, घी, पनीर और आइसक्रीम के दाम कम होना आम जनता के लिए तोहफ़ा साबित होगा। यह कदम एक तरफ़ जहां economic relief देगा, वहीं दूसरी ओर demographic बहस के बीच सरकार के लिए राजनीतिक बढ़त का साधन भी बन सकता है।
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डेयरी इंडस्ट्री को बढ़ावा
भारत में डेयरी इंडस्ट्री दुनिया की सबसे बड़ी इंडस्ट्री में से एक है। यहां करोड़ों किसान और दुग्ध उत्पादक इस सेक्टर पर निर्भर हैं। जब दूध और घी जैसे उत्पादों की कीमतें कम होंगी, तो उपभोक्ता ज्यादा खरीदारी करेंगे। इसका असर सीधे उत्पादन और बिक्री पर पड़ेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
भारत का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर टिका हुआ है और डेयरी उत्पाद इसका अहम हिस्सा हैं। दूध की कीमत घटने से गांवों में खपत बढ़ेगी। किसान अपनी अतिरिक्त उपज बेचकर ज्यादा आमदनी कर पाएंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे ग्रामीण भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी।
उपभोक्ता बाजार में हलचल
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे ही dairy products price घटेंगे, उपभोक्ता बाजार में हलचल देखने को मिलेगी। सुपरमार्केट और रिटेल स्टोर्स पर दूध, घी और पनीर की बिक्री तेजी से बढ़ेगी। साथ ही आइसक्रीम जैसी लक्जरी कैटेगरी में भी खपत बढ़ने की संभावना है। यह कदम कंपनियों के लिए भी फायदे का सौदा साबित हो सकता है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ अल्पकालिक राहत नहीं है। अगर टैक्स दरें स्थिर रहती हैं, तो आने वाले समय में inflation control करने में भी मदद मिलेगी। उपभोक्ताओं की जेब हल्की होने के साथ-साथ उनका विश्वास भी सरकार पर मजबूत होगा। वहीं विपक्षी दल इसे लेकर सरकार से और सवाल पूछ सकते हैं।



