Bihar News: Qualified Teachers Salary को लेकर संकट, छह माह से नहीं मिला वेतन

Qualified Teachers Salary

Qualified Teachers Salary: शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सीतामढ़ी (Sitamarhi) जिले में कई ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने समक्षता परीक्षा (Sakshmata Exam) पास की है, लेकिन उन्हें पिछले छह से नौ माह तक वेतन (Salary) नहीं मिला। Qualified Teachers Salary का यह संकट न सिर्फ शिक्षकों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कमजोरियों को भी उजागर करता है।

मार्च से अटका वेतन

मार्च 2025 में शिक्षक रविशंकर कुमार सिंह को सक्षमता-2 परीक्षा पास करने के बाद विद्यालय में पदस्थापित किया गया। उन्होंने नियमित रूप से शिक्षण कार्य शुरू किया, लेकिन आज तक उन्हें एक भी माह का वेतन नहीं मिला।

उनका कहना है कि जिला शिक्षा कार्यालय में बार-बार सभी कागजात जमा किए गए, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि “तकनीकी समस्या (Technical Issue)” की वजह से वेतन जारी नहीं हो पा रहा है।

इसी प्रकार, मध्य विद्यालय चंडिहा बालक में कार्यरत शारीरिक शिक्षक मुकुल प्रसाद द्विवेदी का वेतन भी पिछले नौ माह से रुका हुआ है। Qualified Teachers Salary का यह मामला अब शिक्षकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

कहां फंसा है पेच?

  • दस्तावेज़ीकरण की समस्या: जिला शिक्षा कार्यालय ने सभी आवश्यक कागजात मांगे थे। शिक्षक बताते हैं कि उन्होंने सभी दस्तावेज़ समय पर दिए, फिर भी प्रक्रिया अधूरी बताकर वेतन रोका गया।
  • तकनीकी खामियां: शिक्षकों का HRMS और PRAN नंबर जेनरेट हो चुका है, लेकिन सिस्टम में गड़बड़ी का हवाला देकर भुगतान रोका जा रहा है।
  • प्रशासनिक लापरवाही: बार-बार आवेदन देने और अधिकारियों से मुलाकात करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
  • वित्तीय स्वीकृति में देरी: कई बार वेतन रोकने का कारण फंड रिलीज़ में देरी भी होता है।

शिक्षकों की पीड़ा

Qualified Teachers Salary का यह संकट शिक्षकों को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ रहा है।

  • कई शिक्षक कर्ज लेकर घर चला रहे हैं।
  • बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सुविधाओं पर असर पड़ रहा है।
  • परिवार का गुज़ारा बेहद कठिन हो गया है।

कुछ शिक्षकों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो उन्हें धरना-प्रदर्शन करना पड़ेगा या कानूनी रास्ता अपनाना होगा।

शिक्षा व्यवस्था पर असर

वेतन न मिलने से शिक्षकों का मनोबल कमजोर हो रहा है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। विद्यालयों का माहौल प्रभावित हो रहा है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रही तो यह मुद्दा बिहार सरकार (Bihar Government) के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।

प्रशासन की सफाई

जिला शिक्षा कार्यालय का कहना है कि यह मामला “तकनीकी समस्या” से जुड़ा है और इसे जल्द हल किया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षक लगातार काम कर रहे हैं, तो उन्हें छह से नौ माह तक वेतन क्यों नहीं दिया गया?

समाधान क्या होना चाहिए?

  1. जिला स्तर पर विशेष जांच समिति बनाई जाए।
  2. HRMS और PRAN सिस्टम की तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए।
  3. वेतन भुगतान के लिए मैनुअल ओवरराइड (Manual Override) जैसी व्यवस्था लागू की जाए।
  4. राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी शिक्षक छह माह से ज्यादा समय तक वेतन से वंचित न रहे।

Qualified Teachers Salary का यह विवाद केवल सीतामढ़ी तक सीमित नहीं है। बिहार के अन्य जिलों से भी ऐसी शिकायतें आती रहती हैं। यह स्थिति शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

जब कोई शिक्षक योग्यता परीक्षा पास कर चुका है और पूरी निष्ठा से बच्चों को पढ़ा रहा है, तो उसे महीनों तक वेतन से वंचित रखना शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है।

बिहार सरकार को चाहिए कि इस मामले को प्राथमिकता से सुलझाए और शिक्षकों को उनका अधिकार समय पर दे। तभी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है और शिक्षक पूरी ऊर्जा के साथ पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

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