पटना – शिक्षा के क्षेत्र में बिहार और गुजरात के बीच एक नया कदम उठाया गया है। पटना स्थित AN College और गांधीनगर का Government Science College, Gandhinagar अब मिलकर academic collaboration करेंगे। दोनों संस्थानों ने हाल ही में एक Memorandum of Understanding (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मकसद है – शिक्षा, शोध और संस्थागत सुधार में आपसी सहयोग बढ़ाना।
Faculty Exposure Program से मिली नई राह
गुजरात सरकार के Faculty Exposure Program के तहत गांधीनगर की टीम ने 10 और 11 सितंबर को AN College, Patna का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कॉलेज की teaching methods, administrative structure, और curriculum system का गहराई से अवलोकन किया। इस दौरे के बाद दोनों कॉलेजों ने तय किया कि वे best practices साझा करेंगे और मिलकर काम करेंगे।
MoU से क्या बदलाव आएंगे?
इस समझौते से न केवल कॉलेज बल्कि छात्र और शिक्षक भी लाभान्वित होंगे। कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:
- Academic Quality Improvement: पाठ्यक्रमों में सुधार और नई teaching-learning techniques का इस्तेमाल।
- Research Collaboration: दोनों कॉलेज मिलकर joint research projects, publications, और innovative activities करेंगे।
- Faculty & Staff Exchange: शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों का exchange program।
- Student Development Programs: छात्रों के लिए seminars, workshops, training sessions और conferences।
- NAAC & NIRF Preparation: Accreditation और ranking process में मदद और अनुभव साझा करना।
छात्रों को अब बेहतर research facilities, आधुनिक laboratories, और skill-based programs का लाभ मिलेगा। इससे उनकी knowledge और employability दोनों बढ़ेंगी। साथ ही, वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
शिक्षकों के लिए यह साझेदारी एक सुनहरा अवसर है। उन्हें training workshops, research grants, और professional development programs के माध्यम से नए अनुभव और कौशल हासिल होंगे। इससे उनकी academic growth में मदद मिलेगी और कॉलेज में शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ेगी।
संस्थागत सुधार और भविष्य की संभावनाएँ
एएन कॉलेज लंबे समय से NAAC accreditation और NIRF ranking सुधारने की दिशा में काम कर रहा है। अब गुजरात जैसे अग्रणी राज्य के साथ सहयोग से प्रशासनिक प्रक्रियाओं में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल सिर्फ दो कॉलेज तक सीमित नहीं रहेगा। अगर यह सफल होता है, तो आने वाले समय में देशभर के higher education institutions भी इस तरह की academic collaborations अपनाने लगेंगे।



