नेपाल इन दिनों उथल-पुथल से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू की सड़कों पर गुस्से से भरे युवा जमा हो रहे हैं। हाथों में तख्तियां, होठों पर नारे और आंखों में बदलाव का सपना लिए ये Gen-Z प्रदर्शनकारी मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से पूरी तरह नाराज़ दिखाई दे रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे आंदोलन के बीच एक आवाज़ बार-बार गूंज रही है— “हमें मोदी जैसा नेता चाहिए!”
नेपाल के नौजवान अब पुरानी राजनीति से ऊब चुके हैं। नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप, परिवारवाद की जड़ें, और महंगाई ने उनका भरोसा तोड़ दिया है। आम लोगों को रोज़गार के मौके नहीं मिल रहे, जबकि नेताओं के बेटे-बेटियां ऐशो-आराम में जिंदगी बिता रहे हैं। यही असमानता युवाओं को सबसे ज्यादा चुभ रही है।
सोशल मीडिया पर भी युवाओं ने गुस्सा उतारा। जब सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसी ऐप्स पर निगरानी और पाबंदी की बात की, तो इसे सीधे “हमारी आवाज़ दबाने की कोशिश” माना गया।
“मोदी जैसा नेता” – आखिर क्यों?
जब प्रदर्शनकारियों से पूछा गया कि “मोदी जैसा नेता क्यों चाहिए?” तो उनका सीधा जवाब था— “हमें ऐसा नेता चाहिए जो फैसले ले सके, भ्रष्टाचार से समझौता न करे और देश को सही दिशा में ले जाए। मोदी की यही छवि हमें भरोसा देती है।”
भारत में नरेंद्र मोदी को उनके समर्थक एक मजबूत और निर्णायक नेता मानते हैं। यही छवि नेपाल के युवाओं को आकर्षित कर रही है। उन्हें लगता है कि उनके देश को भी किसी ऐसे चेहरे की ज़रूरत है, जो न केवल वादे करे बल्कि उन पर अमल भी कर दिखाए।
हालाँकि नेपाल में मोदी जैसा करिश्माई नेता सीधे तौर पर नहीं है, लेकिन कुछ नाम युवाओं के बीच तेजी से चर्चा में हैं:
- काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह – बेबाक और ईमानदार छवि।
- पूर्व चीफ जस्टिस सुषिला कार्की – न्यायप्रिय और सख्त स्वभाव।
- कुलमान घिसिंग – ऊर्जा क्षेत्र में सुधार लाने वाले अधिकारी।
हालात जितने बिगड़े हुए हैं, उतनी ही मुश्किल राह भी है। नेपाल में लोकतंत्र बार-बार अस्थिर रहा है। सरकारें कुछ महीनों से लेकर कुछ सालों में गिर जाती हैं। ऐसे में किसी एक नेता को लंबे वक्त तक स्थिरता के साथ काम करना आसान नहीं है।
युवाओं की उम्मीदें भी बहुत बड़ी हैं। वे चाहते हैं कि रातों-रात बदलाव आ जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह गुस्सा और भी बड़ा संकट खड़ा कर सकता है।
नेपाल की इस हलचल पर भारत और बाकी पड़ोसी देशों की भी नजर है। भारत और नेपाल के रिश्ते ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद गहरे हैं। अगर नेपाल में अस्थिरता और बढ़ती है, तो इसका असर सीमा क्षेत्रों और दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ना तय है।
नेपाल के युवाओं का यह आंदोलन सिर्फ एक राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह उनके सपनों, उम्मीदों और गुस्से की आवाज़ है। वे बदलाव चाहते हैं, और उस बदलाव के लिए “मोदी जैसा नेता” एक प्रतीक बन गया है।
भले ही मोदी नेपाल के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते, लेकिन उनका नाम वहां की सड़कों पर गूंजना बताता है कि लोग किस तरह के नेतृत्व की तलाश कर रहे हैं— सख्त, ईमानदार और विकास की राह दिखाने वाला।



