नई दिल्ली: याद कीजिए वो वक्त जब हर दूसरे हाथ में Xiaomi का फोन दिखता था। बजट सेगमेंट में इसका दबदबा था। लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है — कंपनी टॉप-3 में बने रहने के लिए जूझ रही है। आइए समझते हैं क्यों।
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में मुश्किलें जारी हैं, क्योंकि 2025 की पहली तिमाही में कुल शिपमेंट्स में 8 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो 32.4 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच गई है. इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर Xiaomi पर पड़ा है, जो कभी भारत का मार्केट लीडर था. जबकि कुल बाजार में गिरावट आई है, Xiaomi (जिसमें Poco भी शामिल है) के शिपमेंट्स में सबसे तेज गिरावट देखी गई है.
चीनी स्मार्टफोन निर्माता के शिपमेंट्स में 2025 की पहली तिमाही में साल दर साल 38 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, जो प्रतिस्पर्धियों में सबसे अधिक है.
ब्रांड ने पहली तिमाही में 4 मिलियन यूनिट्स शिप किए, जबकि Q1 2024 में यह संख्या 6.4 मिलियन थी, जिससे इसका बाजार हिस्सा 18 प्रतिशत से घटकर 12 प्रतिशत हो गया. यह तब है जब Xiaomi ने साल की पहली तिमाही में अपने दो महत्वपूर्ण लाइन-अप्स लॉन्च किए: Redmi Note 14 सीरीज और फ्लैगशिप Xiaomi 15 लाइनअप
1. कड़ी प्रतिस्पर्धा — मौका किसने छीन लिया?
Xiaomi ने भारत में एंट्री करते ही उपभोक्ताओं को कम दाम में बेहतर फीचर्स दिए और जल्दी लोकप्रिय हो गया। लेकिन जैसे-जैसे बाज़ार बड़ा हुआ, Samsung, Realme, Vivo, Oppo और iQOO ने आक्रामक प्लानिंग और लगातार नए मॉडल लाकर ग्राहकों को टार्गेट किया। इन ब्रांड्स ने खासकर मिड-रेंज और प्रीमियम सेगमेंट में तेज़ी दिखाई — और Xiaomi की पकड़ ढीली पड़ गई।
2. सरकारी जाँच और कानूनी मुद्दे — भरोसे पर असर
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी को भारत में कई बार ईडी/टैक्स जांच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बैंक खाते या संपत्तियों पर कार्रवाई जैसी खबरें ब्रांड की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं और कुछ उपभोक्ताओं के भरोसे को भी प्रभावित कर सकती हैं।
3. इनोवेशन में कमी — नया क्या दिया?
Xiaomi का शुरुआती USP था — “सस्ते दाम पर हाई-टेक” — लेकिन समय के साथ उपभोक्ता उम्मीदें बदल गईं। अब ग्राहकों को फास्ट चार्जिंग, बेहतरीन कैमरा, 5G सपोर्ट और प्रीमियम डिजाइन की चाहत है। कई प्रतियोगी इन क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ गए, जबकि Xiaomi के कुछ मॉडल इन नए ट्रेंड्स को उतनी जल्दी अपनाने में धीमे रहे।

4. ऑफलाइन मार्केट — जहाँ बाज़ार असली है
भारत में फोन की बिक्री का बड़ा हिस्सा अभी भी ऑफलाइन रिटेल से आता है। Oppo और Vivo ने रिटेल नेटवर्क और पार्टनरशिप पर भारी निवेश किया — रिटेलर्स को बेहतर मार्जिन और सपोर्ट दिया गया। Xiaomi ने शुरुआत से ऑनलाइन-फर्स्ट रणनीति अपनाई, लेकिन ऑफलाइन में उसका नेटवर्क उतना मजबूत नहीं बन पाया, जिससे ब्रिकी पर असर पड़ा।
5. ब्रांड इमेज — सस्ता बनाम प्रीमियम
शुरूआती दिनों में उपभोक्ता Xiaomi को सस्ता और भरोसेमंद मानते थे। अब जब प्रतियोगी मिड-रेंज और प्रीमियम सेगमेंट में मजबूत प्रोडक्ट ला रहे हैं, तो कई खरीदार Xiaomi को उतना प्रीमियम विकल्प नहीं समझते। खासकर युवा और टेक-सैवी ग्राहक अब OnePlus, iQOO और Samsung जैसी ब्रांड्स की ओर झुक रहे हैं।
Xiaomi ने पिछले साल Vivo के साथ कंधे से कंधा मिलते हुए पहली तिमाही में 19% का मार्केट शेयर कैप्चर किया था। इस साल कंपनी का भारी नुकसान हुआ है और चीनी ब्रांड का मार्केट शेयर घटकर महज 13% रह गया है। इस तरह मार्केट शेयर में शाओमी चौथे नंबर पर पहुंच गया है। Realme का मार्केट शेयर 1% बढ़ा है। फिर भी कंपनी 11% मार्केट शेयर के साथ पांचवे नंबर पर रही है। पिछले साल की पहली तिमाही में रियलमी का मार्केट शेयर 10% था।
Xiaomi क्या कर सकती है?
Xiaomi को फिर से रफ्तार पकड़नी है तो उसे निम्न बातों पर ध्यान देना होगा:
- इनोवेशन: कैमरा, चार्जिंग, और सॉफ़्टवेयर अनुभव में तेज़ी लाना।
- ऑफलाइन एक्सपेंशन: रिटेल पार्टनर्स के साथ बेहतर डील और लोकल सपोर्ट।
- ब्रांड बिल्डिंग: प्रीमियम इमेज के लिए मार्केटिंग और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में संतुलन।
- कानूनी और कॉरपोरेट ट्रांसपेरेंसी: लोकल कम्यूनिटी और कस्टमर ट्रस्ट को बहाल करना।
इन कदमों से Xiaomi वापसी कर सकता है — लेकिन समय, रणनीति और निवेश अहम होंगे।
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