Trump Slams China: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump एक बार फिर से चर्चा में है। इस बार उन्होंने चीन पर टिपण्णी करते हुए तीखा हमला बोलते हुए उसे economic hostile country यानि आर्थिक रूप से शत्रुतापूर्ण देश बताया है। ट्रंप का कहना यह है कि चीन जानबूझकर अमेरिकी सोयाबीन खरीदने से मना कर रहा है क्योंकि वह जानता है कि इससे अमेरिका और वहा रहने वाले किसानों और वहा की अर्थव्यवस्था को इससे हानि पहुंच सकती है।
ट्रंप ने यह बात उस समय कही जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ रहा है। ट्रंप, जो 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल थे और अभी भी वह अमेरिकी राजनीति के केंद्र में बने हुए है उनका कहना यह है कि चीन की यह नीति “अमेरिकी किसानों पर सीधा वार है”।
ट्रंप का बयान ओर उसका संदर्भ
ट्रंप ने अपने बयान में कहा,
“चीन ने अमेरिकी सोयाबीन नहीं खरीदने का फैसला लेकर हमारे मेहनती किसानों के साथ धोखा किया है। यह कोई साधारण व्यापक decision नहीं बल्कि अमेरिका के खिलाफ एक आर्थिक दुश्मनी का कार्य है”।
Donald J. Trump Truth Social Post 03:37 PM EST 10/14/25
I believe that China purposefully not buying our Soybeans, and causing difficulty for our Soybean Farmers, is an Economically Hostile Act. We are considering terminating business with China having to do with Cooking Oil,…
— Commentary Donald J. Trump Posts From Truth Social (@TrumpDailyPosts) October 14, 2025
ट्रंप ने कहा कि जब वह white House में थे तब उन्होंने चीन के साथ “Fare Trade deal” की थी ,जिसके तहत चीन को बड़ी मात्रा में अमेरिका की कृषि से जो उत्पाद बनता है विशेषकर सोयाबीन खरीदने पर सहमति जतानी पड़ी थी। लेकिन अब , उनके अनुसार, बाइडेन प्रशासन की कमजोर नीतियों के कारण चीन से पुरानी राह पर लौट आया है।
उन्होंने कहा कि चीन की इस चाल का सीधा असर अमेरिकी किसानों पर पड़ रहा है खासकर midwest राज्यों जैसे आयोवा, इलिनॉय और नेब्रास्का पर जहां सोयाबीन बड़ी मात्रा मे उगाया जाता हैं।
अमेरिकी किसानों की चिंता बढ़ी
सोयाबीन अमेरिका का एक महत्वपूर्ण export product है, और चीन उसका सबसे बड़ा विदेशी मार्केट रहा है। हर साल अरबों डॉलर का सायनाबीन चीन को बेचा जाते रहे हैं। लेकिन हाल ही में चीन ने ब्राजील ओर अर्जेंटीना जैसे देशों से अपना import बढ़ा दिया है, जिससे अमेरिकी किसानों की चिंता बढ़ गई है।
जॉन पीटरसन: इलिनॉय के एक किसान
“चीन हमारे सोयाबीन की खरीद को घटा रहा है , और इसका सीधा असर हमारे मुनाफे पर पड़ रहा है । लागत तो वहीं है पर दाम बहुत गिर गया है।अगर यह ऐसे ही जारी रहा तो आने वाले समय में नुकसान तय है”।
किसानों का मानना है कि चीन ने यह कदम न सिर्फ ट्रेड प्रेशर बनाने की रणनीति है बल्कि राजनीतिक संकेत भी है। कई analyst का मानना है कि चीन अमेरिका के बढ़ते टैरिफ और तकनीकी प्रतिबंधों के जवाब में यह soft retaliation कर रहा है।
न्यू सप्लायर: ब्राजील और अर्जेंटीना
ब्राजील जो पहले ही सोयाबीन उत्पादन में अमेरिका से आगे निकल चुका है, अब चीन का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है । चीन ने ब्राजील के किसानों के साथ लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट किए हैं और दक्षिण अमेरिकी देशों में भारी निवेश भी किया है।
एक चीनी व्यापार विशेषज्ञ के अनुसार
“अमेरिका के साथ राजनीतिक तनाव बढ़ने के बाद चीन ने अपनी खाद्य सुरक्षा नीति में विविधता लाई है। ब्राजील और अर्जेंटीना से खरीद बढ़ाना उसका रणनीतिक कदम है ताकि वह अमेरिकी पर पूरी तरह से निर्भर न रहे।”
दक्षिण अमेरिका अब चीन के लिए एक “विश्वस्नीय कृषि भागीदार” के रूप में उभर रहा है।
ट्रंप की चेतावनी: “व्हाइट हाउस में लौटने पर जवाब मिलेगा”
ट्रंप ने अपने भाषण में साफ चेतावनी दी कि अगर वह फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति बने ,तो चीन को कठोर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे।
“अगर चीन यह सोच रहा है कि अमेरिका कमजोर है , तो वे बहुत बड़ी गलती कर रहा है। जब मैं सत्ता में वापस लौटूंगा, तो हम हर आर्थिक अत्याचार का जवाब देंगे – और इस बार पहले से कही ज्यादा सख्ती से।”
ट्रंप ने यह कहा कि वे अमेरिकी कृषि क्षेत्र की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में रखेंगे। उन्होंने वादा किया कि वे “China Trade Deal” को फिर से बनाएंगे और यह तय करेंगे कि अमेरिका के किसानों को न्यायपूर्ण बाज़ार मिले।
बाइडन प्रशासन की प्रतिक्रिया
“हम चीन के साथ साथ सभी प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के साथ संवाद बनाए हुए हैं। हमारा लक्ष्य अमेरिकी कृषि निर्यात को स्टेबल और लॉन्ग टर्म बनाना है”
अमेरिका व्हाइट हाउस ने ट्रंप के आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “अमेरिका अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर कदम उठा रहा है।”
कृषि विभाग (USDA) के एक बयान मे कहा गया ,
हालांकि विपक्ष का कहना है कि बाइडन प्रशासन चीन पर पर्याप्त दवाब नहीं बना पा रहा है और इससे अमेरिकी किसान नुकसान झेल रहे है।
भविष्य की राह: व्यापार या टकराव
अमेरिका और चीन के बीच यह नया विवाद दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक युद्ध अब केवल तकनीकी या टैरिफ तक सीमित नहीं है। यह food security और supply chain politics तक फ़ैल चुका है।
ट्रंप इस मुद्दे को चुनावी हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर रहे हैं। वे बार बार यह संदेश दे रहे हैं कि “सिर्फ ट्रंप ही चीन से अमेरिका के हितों की रक्षा कर सकते हैं।