Trump Friend Murder: कॉमेडियन की टिप्पणी — चैनल ने शो ऑफ-एयर कर दिया

Trump Friend Murder

Trump Friend Murder: अमेरिकी मीडिया, राजनीति और पॉप कल्चर तीनों का मिलाजुला स्वरूप एक बार फिर चर्चा में आ गया है — इस बार वजह बना एक मज़ाक, एक हत्या और एक कॉमेडी शो का बंद हो जाना।

पिछले हफ्ते, अमेरिका के कंजरवेटिव एक्टिविस्ट और ट्रंप समर्थक चार्ली कर्क की एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह ख़बर वैसे तो देश भर के अखबारों और चैनलों में आई, लेकिन असली बवंडर तब उठा जब लेट-नाइट कॉमेडियन जिमी किमेल ने अपने शो में इस हत्या को लेकर एक तीखी, विवादित और व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।

अब नतीजा ये हुआ कि एबीसी (ABC) नेटवर्क ने Jimmy Kimmel Live! को अनिश्चितकाल के लिए ऑफ-एयर कर दिया है।

हत्या, राजनीति और शोबिज़ का टकराव

Trump Friend Murder 10 सितंबर 2025 को, युटा वैली यूनिवर्सिटी में आयोजित एक राजनीतिक डिबेट के दौरान, चार्ली कर्क को गोली मार दी गई। वह एक लोकप्रिय लेकिन विवादास्पद राजनीतिक चेहरा थे, खासकर ट्रंप समर्थक युवा वर्ग में।

कर्क की हत्या के तुरंत बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शोक जताया। उनकी पोस्ट भावनात्मक थी, लेकिन कई लोगों को उसमें “नाटकीयता” की झलक भी दिखी।

उसी सप्ताह जिमी किमेल ने अपने शो में ट्रंप की इस प्रतिक्रिया पर व्यंग्य किया और कहा,

“ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने उनकी गोल्डफ़िश मार दी हो — ये तो ग़म में डूबा हुआ बच्चा लग रहा है, कोई नेता नहीं।”

किमेल यहीं नहीं रुके। उन्होंने यह भी कहा कि “MAGA गैंग” इस हत्या को अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर रही है, और हत्यारे को एक तरह से “अपना ही” दिखा रही है, ताकि इसे राजनीतिक हथियार की तरह चलाया जा सके।

किमेल की टिप्पणियाँ सामने आते ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। ट्विटर पर #BoycottKimmel ट्रेंड करने लगा, वहीं कुछ लोग #IStandWithKimmel के साथ खड़े दिखे।

ट्रंप समर्थकों और कई कंजरवेटिव मीडिया हाउस ने इसे “अत्यंत असंवेदनशील और अमानवीय” बताया।

दूसरी ओर, प्रगतिशील तबके के कई पत्रकारों और कलाकारों ने किमेल का बचाव किया। उनका मानना था कि “व्यंग्य और कटाक्ष कॉमेडी का हिस्सा हैं”, और अगर समाज इस पर बहस नहीं झेल सकता, तो यह खुद लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।

ABC और FCC की कार्रवाई

कनज़र्वेटिव मीडिया नेटवर्क Nexstar Media, जो कई स्थानीय ABC स्टेशनों को संचालित करता है, ने इस टिप्पणी को “unacceptable” बताया और शो को रोकने की मांग की।

फेडरल कम्युनिकेशन कमीशन (FCC) के चेयरमैन ब्रैंडन कार ने चेतावनी दी कि यदि चैनल इसपर कोई कार्रवाई नहीं करता, तो ब्रॉडकास्ट लाइसेंस पर असर पड़ सकता है।

इन दबावों के चलते, ABC ने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि Jimmy Kimmel Live! को “अस्थायी रूप से रोका जा रहा है, जब तक स्थिति की समुचित समीक्षा नहीं हो जाती।”

ट्रंप की प्रतिक्रिया और राजनीतिक रंग

पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने इस निर्णय का स्वागत किया और किमेल को “ZERO talent” बताते हुए अपनी ट्रेडमार्क शैली में कहा,

“Great News for America!”

यह बयान भी खूब वायरल हुआ, और ट्रंप समर्थकों ने इसे “अच्छे दिनों की वापसी” बताया।

वहीं, किमेल की ओर से कोई आधिकारिक माफ़ी या प्रतिक्रिया नहीं आई है। उनका सोशल मीडिया अकाउंट फिलहाल चुप है, और उनके टीम ने “नो कमेंट” का रुख अपनाया है।

अभिव्यक्ति की आज़ादी बनाम जिम्मेदारी

यह घटना अमेरिका में लंबे समय से चल रही उस बहस को फिर से सामने लाती है:
क्या कॉमेडी को सीमित किया जाना चाहिए?
क्या राजनेताओं और विचारधाराओं पर व्यंग्य करना गलत है, खासकर जब कोई दुखद घटना हो?

किमेल ने जो कहा, वह शायद कई लोगों को असंवेदनशील लगा हो, लेकिन क्या उसे शो से हटा देना समाधान है — या यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है?

यह भी विचारणीय है कि क्या राजनीतिक दल और संस्थाएँ अपनी आलोचना सहन नहीं कर पा रही हैं, या फिर सामाजिक जिम्मेदारी के नाम पर मीडिया को एकतरफा रूप से नियंत्रित किया जा रहा है।

चार्ली कर्क की हत्या निस्संदेह दुखद और निंदनीय है। लेकिन उससे उपजी प्रतिक्रियाओं की राजनीति और कॉमेडी के क्षेत्र में सेंसरशिप की मांग कहीं न कहीं एक बड़े लोकतांत्रिक सवाल को जन्म देती है।

जिमी किमेल का शो भले ही कुछ हफ्तों के लिए बंद हो गया हो, लेकिन जो बहस उन्होंने छेड़ी है — वो शायद और ज़्यादा गूंजेगी।

अब देखना ये होगा कि क्या ये बहस कॉमेडी को और ज़्यादा राजनीतिक बनाएगी, या फिर कॉमेडियन खुद को “सेल्फ-सेंसर” करना शुरू कर देंगे।

क्योंकि आख़िर में, मज़ाक मज़ाक ही है — लेकिन आजकल, हर बात राजनीतिक हो जाती है।

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