जम्मू Poonch LoC Firing: सोमवार सुबह पुंछ जिले के बालाकोट सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर अचानक हालात तनावपूर्ण हो गए। भारतीय सेना ने जब सीमा पार से संदिग्ध गतिविधि देखी तो तुरंत कार्रवाई शुरू की। सेना की चुनौती का सामना होते ही संदिग्ध घुसपैठियों ने भी गोलीबारी की, जिसके बाद दोनों ओर से भीषण फायरिंग शुरू हो गई।
सूत्रों के मुताबिक, सेना के जवानों ने बाड़ से आगे डब्बी इलाके में संदिग्धों की हरकतें नोटिस की थीं। ये संदिग्ध लोग जीरो लाइन के पास मौजूद थे और शक है कि उनका मकसद भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करना था। जैसे ही उन्हें चेतावनी दी गई, उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की और इसके बाद हालात और गंभीर हो गए।
गोलीबारी के हालात और सेना की कार्रवाई
भारतीय सेना लगातार इस बात पर जोर देती रही है कि सीमा पर हर घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया जाएगा। यही वजह है कि पुंछ के बालाकोट सेक्टर में सेना ने तत्काल मोर्चा संभाल लिया। जानकारी के अनुसार, मौके पर अतिरिक्त बल भेजा गया है ताकि घुसपैठियों को किसी भी तरह का मौका न मिले।
डिफेंस सूत्रों ने बताया कि सेना ने संदिग्धों की गतिविधि का तुरंत पता लगाकर उन्हें रोकने की रणनीति अपनाई। इस दौरान आधुनिक निगरानी उपकरणों और नाइट विजन डिवाइस की मदद से हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है।
LoC पर तनाव का पुराना इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब पुंछ सेक्टर में गोलीबारी की घटना हुई हो। नियंत्रण रेखा पर अक्सर ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं। पाकिस्तान की ओर से आतंकियों को सीमा पार कराने की कोशिश लंबे समय से होती रही है।
2016 के उरी हमले के बाद से भारतीय सेना ने LoC पर चौकसी और सख्ती और बढ़ा दी है।
2019 में पुलवामा हमले के बाद हालात और बिगड़े, जिसके बाद सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।
पुंछ और राजौरी जैसे इलाके अक्सर घुसपैठियों के निशाने पर रहते हैं क्योंकि यहाँ की भौगोलिक परिस्थितियाँ और घने जंगल उन्हें छिपने में मददगार साबित होते हैं।
बालाकोट सेक्टर क्यों महत्वपूर्ण है?
पुंछ जिले का बालाकोट सेक्टर सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ पहाड़ी इलाका और जंगल आतंकियों को छिपने का अवसर देते हैं। यही वजह है कि अक्सर घुसपैठ की कोशिशें इसी सेक्टर से होती हैं।
भारतीय सेना ने इस इलाके में कई बार बड़े ऑपरेशन चलाए हैं और कई आतंकियों को ढेर भी किया है। हाल ही में, सेना ने राजौरी-पुंछ क्षेत्र में कई एनकाउंटर किए, जिनमें बड़ी संख्या में घुसपैठिए मारे गए।
स्थानीय निवासियों में दहशत
सीमा से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच गोलीबारी के बाद दहशत का माहौल है। कई ग्रामीणों ने सुरक्षा कारणों से अपने घरों से बाहर निकलने से परहेज किया है। बच्चों को स्कूल भेजने में भी परिवार झिझक महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हर बार गोलीबारी होने पर उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ती है। उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है, खेती-बाड़ी का काम रुक जाता है और सुरक्षा की चिंता लगातार बनी रहती है।
सरकार और सेना की रणनीति
केंद्र सरकार और सेना पहले ही साफ कर चुकी है कि भारत अपनी सीमा पर किसी भी घुसपैठ को बर्दाश्त नहीं करेगा। यही वजह है कि LoC पर लगातार चौकसी बढ़ाई जा रही है।
सुरक्षा बलों की संख्या को बढ़ाया गया है।
तकनीकी निगरानी (ड्रोन, कैमरे और सेंसर) का इस्तेमाल किया जा रहा है।
गांवों में सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जा रहा है ताकि लोग सुरक्षित रहें।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ यह साबित करती हैं कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी लगातार भारत में घुसने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सेना की मुस्तैदी से उनके मंसूबे नाकाम हो रहे हैं।
भारत हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मुद्दा उठाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को शह देता है और उसकी सरजमीं से आतंकी गतिविधियाँ संचालित होती हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन भी पाकिस्तान को चेतावनी दे चुके हैं।
हालाँकि, भारत ने यह भी साफ किया है कि वह किसी भी तरह की उकसावे की कार्रवाई का करारा जवाब देगा। बालाकोट सेक्टर की ताज़ा घटना भारत की उसी नीति का हिस्सा है जिसमें सीमा पर हर घुसपैठ की कोशिश का तुरंत जवाब दिया जाता है।



