Pakistan BISP Scam: 324 अधिकारियों ने गरीबों की 3.7 करोड़ रुपये सहायता राशि हड़पी

Pakistan BISP Scam infographic showing corruption in poverty relief fund with broken currency and BISP card

नई दिल्ली : पाकिस्तान में गरीबी उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे बेनजीर आय सहायता कार्यक्रम (Pakistan BISP Scam) में बड़ा घोटाला सामने आया है। महालेखा परीक्षक (एजीपी) की जांच में पाया गया है कि लगभग 3.7 करोड़ रुपये की राशि 324 अधिकारियों ने हड़प ली।

गरीबों के नाम पर हेराफेरी

एजीपी की रिपोर्ट के अनुसार इस घोटाले में निचले स्तर से लेकर उच्च पदों पर बैठे कर्मचारी और अफसर शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि “जिन्हें गरीबों की मदद का जिम्मा सौंपा गया था, वही इस योजना को अपनी कमाई का जरिया बना बैठे।”

जांच के दौरान कई लाभार्थियों ने शिकायत की कि जब वे बीआइएसपी कार्ड से पैसा निकालने जाते हैं तो बैंक कर्मचारी और खुदरा विक्रेता उनसे अवैध शुल्क मांगते हैं। एक महिला लाभार्थी ने बताया—

“हमें 5000 रुपये मिलने थे, लेकिन बैंक वालों ने पहले 200 रुपये देने को कहा। पैसे न देने पर घंटों लाइन में खड़ा रखा।”

सभी स्तर के अधिकारी शामिल

रिपोर्ट के मुताबिक इस भ्रष्टाचार में 324 अधिकारी सीधे तौर पर दोषी पाए गए। इनमें बैंक कर्मचारी, क्षेत्रीय अधिकारी और क्लर्क से लेकर ऊंचे पदों तक के अफसर शामिल हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

बीआइएसपी पाकिस्तान की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना है, जिसका मकसद गरीब परिवारों को वित्तीय मदद देना है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब इस योजना में गड़बड़ी पकड़ी गई हो। इससे पहले भी कई बार यह खुलासा हुआ कि गैर-जरूरी लोगों को लाभ मिल रहा है, जबकि वास्तविक गरीब परिवार वंचित रह जाते हैं।

बीआइएसपी को विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का भी सहयोग मिलता रहा है। भ्रष्टाचार के इन मामलों से पाकिस्तान की वैश्विक छवि प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में विदेशी मदद पर भी असर पड़ सकता है।

विपक्ष का हमला, सरकार की चुप्पी

इस खुलासे के बाद पाकिस्तान की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई करने में नाकाम रही है। एक विपक्षी सांसद ने संसद में कहा—

“गरीबों के पेट पर लात मारकर अफसर अपनी जेब भर रहे हैं और सरकार आंख मूंदकर बैठी है।”

सरकार की ओर से अब तक केवल इतना कहा गया है कि जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि लाभार्थियों का नया सत्यापन किया जाए और डिजिटल भुगतान प्रणाली को और मजबूत बनाया जाए। विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि हर ट्रांजेक्शन पर लाभार्थी को मैसेज अलर्ट भेजा जाए और आसान शिकायत तंत्र बनाया जाए ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके।

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