ICC 2025 मैच रेफरी से पंगा लेना पाकिस्तान को पड़ सकता है भारी — ICC कर सकती है कड़ी कार्रवाई

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ICC: एशिया कप 2025 में भारत-पाकिस्तान मुकाबला जैसे ही समाप्त हुआ, मैदान के बाहर एक घटना ने क्रिकेट फ़ैंस और विशेषज्ञों की नज़रें खींच लीं। पारंपरिक हैंडशेक का न होना और उसके बाद PCB (पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड) द्वारा मैच रेफरी एंडी पॉयक्रॉफ्ट के खिलाफ उठाई गई आपत्ति ने मामूली विवाद को गंभीर तनातनी में बदल दिया है। अब यह मामला ICC (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) के संज्ञान में है और पाकिस्तान को संभावित आर्थिक जुर्माना तथा अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

विवाद कैसे बढ़ा?

मैच के तुरंत बाद खिलाड़ियों के बीच सामान्य व्यवहार न दिखना—यानी हैंडशेक का न होना—से शुरुआत हुई। सोशल मीडिया पर यह घटना तुरंत चर्चा में आ गई और अलग-अलग व्याख्याएँ सामने आने लगीं।विवाद तब और बढ़ा जब PCB ने रेफरी के रवैये पर आपत्ति जताते हुए उनकी भूमिका पर सवाल उठाया और उन्हें आगे के मैचों से हटाने की माँग तक कर दी। ICC ने फिलहाल उस मांग को स्वीकार नहीं किया, लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। बाद में यह जानकारी सामने आई कि PCB ने मैच अधिकारियों से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग की थी — और यह कदम ICC के निर्देशों, विशेषकर PMOA (Players and Match Officials Area) से जुड़े नियमों के विरुद्ध माना जा सकता है।

PMOA और ICC के नियमों की अहमियत

ICC ने खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों के बीच पारदर्शिता, सुरक्षा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कई निर्देश और प्रोटोकॉल तय किए हैं। PMOA का मकसद यही सुनिश्चित करना है कि मैच अधिकारियों और खिलाड़ियों के बीच की संवेदनशील बातचीत बाहरी दबाव या रिकॉर्डिंग से प्रभावित न हो। ऐसे किसी भी रिकॉर्डिंग या अनाधिकृत हस्तक्षेप को गंभीर उल्लंघन माना जाता है।

इसके अलावा, मैच शेड्यूल में देरी, अधिकारियों के साथ अनुचित बर्ताव या सार्वजनिक बयानबाज़ी जो अधिकारियों की प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाये — ये सभी ICC के अनुशासनात्मक दायरे में आते हैं। इसलिए PCB पर लगे आरोपों की जांच का दायरा व्यापक हो सकता है।

ICC किन कदमों पर विचार कर सकती है?

आम तौर पर ICC किसी भी उल्लंघन पर चरणबद्ध कार्रवाई करती है। शुरुआती कदमों में संबंधित बोर्ड से लिखित स्पष्टीकरण माँगा जाता है। उसके बाद अगर मुद्दा गंभीर पाया गया तो ICC निम्न में से कोई भी कार्रवाई कर सकती है:

  • आर्थिक जुर्माना और सार्वजनिक चेतावनी।
  • PCB के कुछ अधिकारियों या टीम प्रबंधन पर अस्थायी प्रतिबंध।
  • भविष्य के टूर्नामेंटों में अतिरिक्त निगरानी या प्रतिबंध।
  • कठोर मामलों में दीर्घकालिक प्रतिबंध/अधिकारों में कटौती।

ICC का मकसद केवल दंड देना नहीं, बल्कि खेल की गरिमा और नियमों की अवज्ञा को रोका जाना है। इसलिए एक स्पष्ट संदेश देना भी उसकी नीतियों में शामिल रहता है।

PCB का बचाव और उसकी संभावित मजबूती

PCB का तर्क रहा है कि उनकी कार्रवाई का उद्देश्य पारदर्शिता और खिलाड़ियों की सुरक्षा था। वे यह भी दावा कर सकते हैं कि किसी भी रिकॉर्डिंग का मकसद गलत सूचना फैलने से रोकना था। साथ ही PCB का कहना है कि रेफरी ने कुछ मामलों में व्यवहार के लिए माफी व्यक्त की।

लेकिन ICC के नियम स्पष्ट हैं और PMOA जैसी पॉलिसी की उल्लंघना अक्सर गंभीर मानी जाती है, चाहे कारण कोई भी हो। इसलिए PCB के स्पष्टीकरण से यह तय होगा कि क्या वह परिस्थितियों को हल्के में बताया जा सकता है या मुद्दा अनुशासनात्मक कार्रवाई तक जाएगा।

खेल और राजनीति — सीमाओं का सवाल

भारत-पाकिस्तान जैसे मुकाबले आम तौर पर सिर्फ खेल नहीं रहते — इनमें इतिहास, राजनीति और भावनाएँ भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। यही वजह है कि छोटी-छोटी घटनाएँ भी तेजी से बढ़ती हैं और मीडिया-सोशल प्लेटफॉर्म पर तूल पकड़ लेती हैं। ICC के सामने चुनौती यही रहती है कि वह खेल को राजनीति और भावनात्मक दबावों से अलग रखे और नियमों का पालन सुनिश्चित करे।

फिलहाल ICC ने PCB से स्पष्टीकरण माँगा है और उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर आगे का रास्ता तय होगा। यदि PCB का जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो आर्थिक जुर्माना लगभग तय माना जा सकता है; और यदि उल्लंघन जानबूझकर पाया गया तो कड़ी सज़ाएँ भी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ICC इस मामले में स्पष्ट संदेश देना चाहेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।

मैच रेफरी के साथ टकराव का मामला केवल एक इवेंट नहीं है — यह नियमों और खेल की गरिमा की रक्षा का प्रश्न है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए यह समय है कि वे नियमों की गंभीरता को समझे और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अनुशासन बनाए रखें। अन्यथा परिणाम सिर्फ आर्थिक जुर्माने तक सीमित नहीं रहेंगे; बोर्ड और टीम की साख पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। अब सबकी निगाहें ICC के निर्णय पर टिक गई हैं — और यह फैसला न सिर्फ PCB के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए भी एक संकेत होगा कि नियम किस हद तक लागू किए जाएंगे।

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