Bihar Election 2025: विधानसभा चुनाव नज़दीक आते ही सियासी माहौल गरमा चुका है। सभी दल अपनी-अपनी रणनीति में जुट गए हैं। सबसे बड़ी चर्चा इस बार जिस मुद्दे को लेकर हो रही है, वह है तेजस्वी यादव का यादव वोट बैंक। लंबे समय से यह वोट बैंक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की रीढ़ माना जाता रहा है। लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस समीकरण में सेंध लगाने के लिए पूरी तरह सक्रिय नज़र आ रही है।
यादव वोट बैंक की अहमिय
Bihar Election 2025 में यादव समुदाय की भूमिका बेहद अहम है। राज्य की कुल आबादी में यादवों की हिस्सेदारी लगभग 14 से 15 प्रतिशत है। यही कारण है कि जिस भी पार्टी के साथ यादव समाज खड़ा होता है, उसके लिए सत्ता का रास्ता आसान हो जाता है। 1990 के दशक से ही लालू प्रसाद यादव ने “MY समीकरण” यानी मुस्लिम + यादव गठजोड़ को मजबूत कर सत्ता पर लंबे समय तक पकड़ बनाए रखी। अब यही समीकरण तेजस्वी यादव के लिए भी राजनीतिक ढाल साबित हुआ है।
तेजस्वी के लिए यादव वोट बैंक सिर्फ संख्या बल नहीं, बल्कि राजनीतिक पहचान का प्रतीक भी है। यही कारण है कि RJD की चुनावी रणनीति का सबसे बड़ा आधार यादव समाज और मुस्लिम वोटर रहे हैं।
बीजेपी की रणनीति – यादवों तक पहुँचने का प्लान
भले ही परंपरागत रूप से यादव समाज RJD का मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन बीजेपी इस बार इसे चुनौती देने के मूड में है। पार्टी ने इस समुदाय तक पहुँचने के लिए कई स्तरों पर तैयारी शुरू कर दी है।
- यादव नेताओं को बढ़ावा: बीजेपी ने संगठन में यादव समाज के नेताओं को अहम जिम्मेदारियाँ देना शुरू कर दिया है। स्थानीय स्तर पर भी ऐसे नेताओं को आगे लाया जा रहा है, जो अपने समाज में पैठ रखते हैं।
- सरकारी योजनाओं का प्रचार: केंद्र की योजनाएँ जैसे प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, आवास योजना और जनधन खाता को यादव बहुल क्षेत्रों में विशेष अभियान के साथ प्रचारित किया जा रहा है। पार्टी चाहती है कि लोग इन योजनाओं को बीजेपी की उपलब्धि मानकर वोट दें।
- परिवारवाद बनाम समाजवाद का नैरेटिव: बीजेपी लगातार यह प्रचारित कर रही है कि तेजस्वी और RJD परिवार की राजनीति तक सीमित हैं। पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि यादव समाज के सामान्य परिवारों को असल में कोई लाभ नहीं मिला, जबकि बीजेपी ने विकास और कल्याणकारी योजनाओं से सीधे उन्हें फायदा पहुँचाया।
- धार्मिक जुड़ाव का इस्तेमाल: यादव समाज का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से भगवान कृष्ण से जुड़ा माना जाता है। बीजेपी इसी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है।
कौन होगा बीजेपी का यादव चेहरा?
चुनाव से पहले यह सवाल भी उठ रहा है कि बीजेपी आखिर यादव समाज को साधने के लिए किस नेता को बड़ा चेहरा बनाएगी। पार्टी के भीतर चर्चा है कि कुछ प्रमुख यादव नेताओं को इस बार चुनाव में टिकट देकर आगे लाया जाएगा। वहीं, यह भी कहा जा रहा है कि बीजेपी उन यादव नेताओं को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है जो इस समय विपक्षी दलों में सक्रिय हैं।
भले ही अभी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर किसी बड़े “यादव नेता” का ऐलान नहीं किया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि इस बार बीजेपी यादव वोट बैंक को नज़रअंदाज़ करने के मूड में नहीं है।
तेजस्वी का पलटवार और RJD की तैयारी
तेजस्वी यादव इस चुनौती को समझते हैं। यही कारण है कि उन्होंने अभी से अपने परंपरागत वोट बैंक को मज़बूत करने की कवायद शुरू कर दी है। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को तेजस्वी लगातार उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बीजेपी समाज को बाँटने और वोट बैंक की राजनीति करने में विश्वास करती है, जबकि RJD विकास और युवाओं के भविष्य की बात करती है।
हाल ही में RJD ने तेजस्वी यादव को टिकट वितरण और रणनीति तय करने का पूरा अधिकार सौंप दिया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि पार्टी पूरी तरह से तेजस्वी के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरने वाली है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यादव वोट बैंक को पूरी तरह तोड़ पाना बीजेपी के लिए आसान नहीं है। लेकिन अगर पार्टी इस वोट बैंक में 15-20 प्रतिशत भी सेंध लगा पाती है, तो नतीजों पर इसका असर साफ दिखाई देगा। बिहार में छोटे-छोटे वोट अंतर ही कई बार सीटों का फैसला कर देते हैं।
दूसरी ओर, RJD का दावा है कि उनका पारंपरिक वोट बैंक पहले से कहीं अधिक मज़बूत है। मुस्लिम समाज का समर्थन भी इस बार बड़े पैमाने पर RJD के साथ नज़र आ रहा है। ऐसे में बीजेपी की कोशिशें कितनी कामयाब होंगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जातीय समीकरणों और सामाजिक इंजीनियरिंग के इर्द-गिर्द घूमने वाला है। बीजेपी यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए नए चेहरे और योजनाओं का सहारा ले रही है, जबकि तेजस्वी यादव अपने परंपरागत आधार को बचाने और युवाओं को आकर्षित करने में जुटे हैं।
अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि इस बार का चुनाव पूरी तरह से तेजस्वी बनाम बीजेपी होगा। आने वाले नतीजे यह बताएंगे कि क्या बीजेपी अपने प्लान में कामयाब होती है या फिर तेजस्वी यादव अपने वोट बैंक को पहले से और मज़बूत बना लेते हैं।
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