Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले कांग्रेस पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को फिर से मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस क्रम में पार्टी 24 सितंबर को पटना में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की अहम बैठक आयोजित करने जा रही है। इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह बैठक केवल औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि बिहार में कांग्रेस की खोई जमीन को वापस हासिल करने और आगामी चुनावों में महागठबंधन में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
बैठक का उद्देश्य
Bihar Chunav 2025 इस बैठक का मुख्य एजेंडा बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी पर विचार-विमर्श करना है। इसमें सीटों के बंटवारे, उम्मीदवार चयन, चुनावी अभियान की रूपरेखा और रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में लगभग 38 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की संभावना है। वहीं पार्टी का लक्ष्य महागठबंधन में 76 सीटों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है।
सोनिया और राहुल गांधी की मौजूदगी इस बैठक की अहमियत को और बढ़ा देती है। पार्टी के लिए यह संदेश भी है कि शीर्ष नेतृत्व इस बार बिहार में पूरी गंभीरता के साथ चुनावी तैयारी कर रही है।
प्रियंका गांधी वाड्रा भी बिहार में अपनी ‘हर घर अधिकार यात्रा’ शुरू करने जा रही हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य महिला मतदाताओं तक पहुंचना और महागठबंधन के चुनावी वादों को हर घर तक पहुंचाना है। पार्टी का मानना है कि महिला मतदाता बिहार में चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
प्रियंका गांधी का यह अभियान कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच भी जोश पैदा कर रहा है। इसका उद्देश्य न केवल वोट बैंक को मजबूत करना है, बल्कि जनता के मुद्दों को सीधे सुनकर उन्हें पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाना भी है।
चुनावी रणनीति पर चर्चा
बैठक में पार्टी उम्मीदवारों के चयन के मानदंड और उनकी पृष्ठभूमि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कांग्रेस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके उम्मीदवार स्थानीय मुद्दों और जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हों।
साथ ही, पार्टी ‘वोट चोरी’ और निर्वाचन आयोग के नवीनतम गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर भी विचार करेगी। पिछले कुछ महीनों में राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही है, जिसने युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं से सीधे संवाद स्थापित किया।
विपक्षी गतिविधियों पर नजर
कांग्रेस ने हाल ही में बीजेपी पर आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी उद्योगपति को बिहार में 1050 एकड़ भूमि मात्र 1 रुपये में 33 वर्षों के लिए आवंटित किया गया है। पार्टी का मानना है कि यह जनता की संपत्ति का दुरुपयोग है।
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस इसे जनता तक पहुंचाकर बीजेपी की नीतियों और नीयत पर सवाल उठाने की योजना बना रही है। पार्टी चाहती है कि चुनाव केवल राजनीतिक मुकाबले तक सीमित न रहे, बल्कि बिहार के लोगों के लिए वास्तविक मुद्दों पर चर्चा भी हो।
पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता से संपर्क
बैठक के बाद पार्टी अपने उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं के साथ व्यापक संपर्क अभियान चलाएगी। इसके तहत कार्यकर्ता घर-घर जाकर मतदाताओं से संवाद करेंगे और उनके सवाल, शिकायतें और सुझाव पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाएंगे।
प्रियंका गांधी की ‘हर घर अधिकार यात्रा’ इसी रणनीति का हिस्सा है। महिला मतदाताओं के मुद्दों को सीधे पार्टी तक पहुंचाना और उन्हें महागठबंधन के वादों से अवगत कराना इसका मुख्य उद्देश्य है।
इसके अलावा पार्टी डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से भी अपनी चुनावी रणनीति को प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है। सोशल मीडिया अभियान, जनसंपर्क कार्यक्रम और डिजिटल प्रचार के जरिए पार्टी चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने का प्रयास करेगी।
कुल मिलाकर, 24 सितंबर की यह बैठक कांग्रेस के लिए बिहार विधानसभा चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसी वरिष्ठ नेतृत्व की मौजूदगी यह संदेश देती है कि पार्टी इस चुनाव को गंभीरता से ले रही है।
बैठक का मुख्य उद्देश्य न केवल चुनावी जीत हासिल करना है, बल्कि बिहार में पार्टी की खोई हुई जमीन को वापस पाना भी है। महागठबंधन में हिस्सेदारी सुनिश्चित करना, उम्मीदवारों का चयन और जनता के मुद्दों पर केन्द्रित चुनावी रणनीति ही इस बैठक का मुख्य एजेंडा होगा।
साथ ही, पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के साथ संवाद और डिजिटल मीडिया के माध्यम से प्रभावी चुनावी प्रचार यह सुनिश्चित करेगा कि कांग्रेस बिहार में फिर से सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभा सके। 24 सितंबर की यह बैठक न केवल रणनीति तय करेगी, बल्कि कांग्रेस के लिए बिहार विधानसभा चुनाव की दिशा भी निर्धारित करेगी। इस बार पार्टी का पूरा ध्यान जनता से सीधे जुड़ाव, स्थानीय मुद्दों की संवेदनशीलता और महागठबंधन में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने पर है।
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