नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के बाद Bharat America Relations साफ दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के साथ सीजफायर का श्रेय न मिलने के चलते अमेरिकी प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगा दिया है। इसके बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक और राजनीतिक संबंध प्रभावित हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, भारत अब अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर भी फिर से विचार कर सकता है।
पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग ने कहा कि ट्रंप बार-बार यह कहते रहे हैं कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर बड़ा मुनाफा कमा रहा है। उनके अनुसार, यह बयान वास्तविकता के बजाय केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा है। गर्ग ने बताया कि रूस से तेल खरीदकर भारत को सालाना करीब 2.5 बिलियन डॉलर (लगभग 2.22 लाख करोड़ रुपये) की बचत हो रही है।
वास्तविक तेल खरीद का आंकड़ा
पूर्व वित्त सचिव ने कहा कि भारत रूस से प्रति बैरल 3-4 डॉलर (264-352 रुपये) की दर से तेल खरीद रहा है। यह वैश्विक बाजार दर के अनुरूप है और किसी अंतरराष्ट्रीय नियम का उल्लंघन नहीं करता।
भारत का ट्रेड डील पर रुख
ट्रेड डील को लेकर भारत ने फिलहाल दूरी बना ली है। गर्ग के अनुसार, इतने ऊंचे टैरिफ के साथ किसी भी देश के लिए व्यापार करना मुश्किल है। भारत ने औपचारिक रूप से अमेरिकी व्यापार के दरवाजे बंद नहीं किए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की शर्तें खासकर कृषि और उपभोक्ता वस्तुओं को लेकर काफी सख्त थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि किसानों के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।
चीन से निवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगाना भारत की बड़ी गलती रही है। गर्ग के अनुसार, अगर चीन के निवेशकों के लिए बाजार खुला रहेगा, तो भारत अन्य देशों पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा।



